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Thursday, 4 July 2019

बजट से किसान-मजदुर को उम्मीद

 एक पत्रकार ने सवाल पूछा-इस साल के बजट में आप किसानों के लिए क्या नई घोषणा चाहते हैं? उस पत्रकार को उम्मीद थी कि मैं अपनी मांगों की एक लंबी लिस्ट उसे दे दूंगा । मैंने उसे निराश करते हुए कहा।  मुझे एक भी नई घोषणा नहीं चाहिए । हर बजट में नई घोषणाओं का क्या फायदा? जब उन पर अमल ही नहीं होता।  मैं तो बस इतना चाहता हूं कि निर्मला सीतारमन जी इस साल फरवरी के अंतिम बजट में पीयूष गोयल जी की सभी घोषणाओं को पूरा कर दें। पिछले कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह द्वारा किसानों को किए गए वादों के लिए बजट में पैसा दे दें।
   

               पिछले कार्यकाल में मोदी सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का नारा दिया था। यह लक्ष्य पूरा करने के लिए हर साल महंगाई के असर को छोड़कर किसानो की वास्तविक आय मे  10.5 % वृद्धि होनी थी। अनुमान लगा सकते हैं कि अब तक सिर्फ दो या तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है कि अब आने वाले 3 साल में कम से कम महंगाई को निकाल कर 15% वृद्धि करनी होगी। खेती की आमदनी में इतनी तेजी से  भारत में पहले भी कभी नहीं हुई है। दुनिया में भी शायद ही कभी हुई हो।
                      वित्त  मंत्री से ऐसे  किसी जादू की अपेक्षा नहीं है मगर इतनी उम्मीद करनी चाहिए कि वे कम से कम पिछले सालों का आंकड़ा दें और बचे हुए 3 सालों के लिए किसानों की आय बढ़ाने की योजना पेश करे। इस बारे में एक सरकारी समिति पिछले साल  आपनी सिफारिश दे चुके है । अब सरकार को लागू करने का मुद्दा दिखाना है। इस रिपोर्ट को लागू करने का मतलब होगा लगभग 20 से 25 लाख करोड़  का निवेश करने के लिए बेहतर व्यवस्था करनी होगी । देश की नीति बदलनी होगी किसान को फायदा हो सके।
                              सरकार ने इस फरवरी में चुनाव से पहले आनन-फानन में किसानों को ₹6000 प्रति वर्ष देने की प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना घोषित की थी । उसके बाद से देश के कोई 12 करोड़ किसान परिवारों में से सिर्फ दो या तीन करोड़ किसान परिवारों को ₹2000 की एक या दो किस्त मिली है। कई किसानों के अकाउंट में पैसा आया और फिर वापस चला गया । किसान संगठनों ने इस राशि को कम बताते हुए इसे बढाने की मांग की थी लेकिन वह बाद की बात है। फिलहाल तो सरकार यही राशि सभी किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था कर चुके कर दे। सच यह है कि अब तक सरकार के पास देश भर के किसानों की कोई सूची ही नहीं है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए सभी किसानों की शिनाख्त  कर उन्हें यह लाभ  पहुंचाने की व्यवस्था की जाए ।

निर्मला सीतारमन, बजट 2019, nirmalla sitaraman, bajut 2019,
     
         पीएम किसान योजना की एक खामी यह थी कि इसने 5 एकड़ से अधिक के किसानों को इस लाभ से वंचित कर दिया था । चुनाव के बाद इस प्रावधान को समाप्त करने की घोषणा सरकार कर चुकी है। अब जरूरत है कि इस योजना के दायरे में देश के सबसे छोटे और कमजोर किसान को लाया जाए। सच यह है कि देश मैं जमीन के मालिक किसानों से अधिक संख्या में वह किसान है जो भूमिहीन है या तो मजदूर के रूप में खेती करते हैं या फिर बटाए और ठेके पर खेत लेकर किसानी करते हैं । अभी तक देश में किसानों को चिन्हित करने और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं है। अगर इस बजट में सरकार इसके लिए प्रावधान करती है तो वह किसानों के लिए वाकई बहुत बड़ा कदम होगा । मोदी सरकार की एक और बड़ी योजना थी पीएम आशा जिसका बड़े गाजे-बाजे के साथ 2018 में उद्घाटन किया गया था । इस योजना का उद्देश्य था कि सभी किसानों को अपनी फसल बेचने की सुविधा मिले। सरकार ने स्वीकार किया था कि अधिकांश किसान अपनी अधिकांश सरकारी रेट पर नहीं भेज पाते हैं और उसके लिए एक नई व्यवस्था की घोषणा की थी। सच यह है कि पिछले साल यह योजना पूरी तरफ असफल हो गई जैसी आधी अधूरी खरीदकर इस योजनाओं से पहले होती थी वैसी ही पिछली साल भी हुई । सच यह है कि इस योजना को सफल बनाने के लिए सरकार को जितना पैसा आवंटित करना था सरकार ने उसका छोटा सा अंश भी नहीं दिया था ।
अगर निर्मला सीतारमन किसानों के कल्याण के बारे में चिंतित है तो उन्हें सबसे पहले किसानों की फसल खरीदने के लिए सरकार के बजट में कम से कम ₹50000 देने चाहिए ।

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                       किसानों से जुड़ी मोदी सरकार की तीसरी बड़ी योजना थी पीएम फसल बीमा योजना। यह योजना भी बुरी हालात में चल रही है । सच यह है कि इस योजना को लागू करने से ना तो लाभार्थी किसानों की संख्या बढ़ी। न हीं किसानों को फसल के नुकसान का मिलने वाला मुआवजा बढ़ा। बस एक चीज बड़ी है और वह निजी कंपनियों का मुनाफा । 20 साल देश के बड़े इलाकों में सूखे की आशंका है । जून के महीनों में बारिश में 33% का घाटा हो चुका है ।किसानों को प्राकृतिक आपदा से राहत दिलाने वाली किसी भी योजना की परीक्षा इस बार होगी। वित्त मंत्री से आशा करनी चाहिए कि वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करेगी और इसके किसान विरोधी प्रावधानों को बदलेगी । इस साल किसानों को इस योजना में क्लेम मिलने की व्यवस्था करनी होगी। फसल बीमा के सिवा सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सरकार के पास राष्ट्रीय आपदा कोष से राहत देने का प्रावधान भी है। वित्तमंत्री से उम्मीद करनी चाहिए कि वे इस वर्ष इस पोस्ट को बनाएगी ताकि इस बार सूखे में देश के किसानों को बेरुखी का सामना ना करना पड़े । सूखे की स्थिति से देश में सिंचाई की योजनाओं पर ध्यान जाता है। अपने पिछले कार्यकाल में मोदी सरकार ने सिंचाई परियोजनाओं और लघु सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा था  । वह लक्ष्य आज भी अधूरा पड़ा है। अगर निर्मला सीतारमण इस बजट में इस योजनाओं को पूरा करने के लिए राशि आवंटित करती है तो किसानों को तात्कालिक राहत से आगे भी कुछ उम्मीद बढेगी ।

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