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Thursday, 22 August 2019

सहारा इंडिया के खाताधारकों को अब उपभोक्ता फोरम का सहारा

सहारा इंडिया के नाम से कौन परिचित नहीं होगा लेकिन जो भी सहारा इंडिया में अपना खाता करवाए, एक एक पाई जमा किए और जब लेने की बारी आई तो सहारा इंडिया परिवार में जुड़े खाताधारक ही बता सकते हैं कि सहारा इंडिया परिवार कितना बड़ा परिवार है और उनका दिल कितना बड़ा है। पैसा लेते समय तो एजेंट एक से बढ़कर एक प्लान बता रहे थे। पैसा दो गुना से 3 गुना, चौगुना कर रहे थे और कर भी दिए। और जब देने की बारी आई तो आंख मिचौली का खेल खेलने लगे। कानून से बचने के दाँव पेंच अपनाने लगे।
न्यूज़  टीम कई ऐसे सहारा परिवार के खाताधारकों से मिले। उनका दर्द सुना और उनके समस्या का समाधान निकाला।
यदि आप भी सहारा इंडिया परिवार के खाताधारक हैं और पैसा देने में आपको आनाकानी कर रहा है, तो यह खबर आपको हद तक मदद कर सकता है।सहारा इंडिया परिवार के कई ऐसे लोग या कहें खाताधारक अपनी समस्या बिहार न्यूज़ हिंदी टीम के साथ शेयर किया और सब का लगभग एक ही समस्या था कि जमा किए गए पैसे का वापस न मिलना और संबंधित कर्मी द्वारा पुनः फिक्स करने का दबाव बनाना।

इसके लिए टीम कई कानून के जानकार व्यक्तियों से एवं खुद सहारा इंडिया परिवार के कर्मियों से बातचीत कीया
मसलन हल यह निकला की… कानून के जानकारों के अनुसार कोई भी कंपनी, व्यक्ति या अधिकारी किसी भी व्यक्ति पर किसी भी फंड में पैसा इन्वेस्ट करने, जमा करने या कोई चीज खरीदने के लिए दबाव नहीं बना सकते। यदि कोई ऐसा करता है तो वे दंड के भागी होंगे
अब आपके मन में यह सवाल चल रहा होगा कि हमें जब किसी प्लान मे पुनः इन्वेस्ट करने की बात कही जाती है तो उन्हें सजा क्यों नहीं होता या उन्हें दंड क्यों नहीं मिलता
गौर करने वाली बात यह है कि जब आप पर कहीं पुनः इन्वेस्ट या फिक्स करने की बात कही जाती है तो आप संबंधित विभाग में उनकी शिकायत नहीं करते हैं। यही वजह है कि आप से पुनः इन्वेस्ट या कहीं डिपॉजिट करने का दबाव बनाया जाता है।
अब आप सोच रहे होंगे कि पुनः इन्वेस्ट करने का दबाव बनाया क्यों जाता है

इसके लिए हमने बात किया बिहार के अररिया जिले के सहारा इंडिया परिवार के एक वरीय अधिकारी एवं कुछ अभीकर्ताओं से। नाम व फोटो गोपनीय रखने की शर्त पर उन्होंने बताया कि ऋ इन्वेस्ट इसलिए कराया जाता है कि अब सहारा इंडिया में कम लोग पैसे जमा करते हैं। दूसरी बात यह है कि जो भी अभिकर्ता पुराने ग्राहकों के पुराने प्लान को ऋइन्वेस्ट कराते हैं तो उन्हें कमिशन कुछ ज्यादा मिलता है। मसलन कंपनी भी तुरंत पेमेंट करने से बच जाती है और उन्हें कुछ समय मिल जाता है।
अब हम आपको बताते हैं यदि आपका पैसा कहीं फंस चुका है तो उन्हें निकाले कैसे?

केस स्टडी 1

9 जुलाई 2018 को खाते में जमा पैसा वापस देने में टालमटोल करने पर सहारा इंडिया परिवार को उपभोक्ता अदालत ने जुर्माना लगाया।
उपभोक्ता फॉर्म में दर्ज याचिका में विमला देवी, गोपाल सिंह, पुष्कर राम इत्यादि ने कहा की सहारा इंडिया कंपनी उनके खाते में जमा राशि का भुगतान नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने लोगों की रकम सहारा इंडिया और कोऑपरेटिव सोसायटी के खाते के बजाय क्यू शॉप में जमा की और अब पैसा वापस देने में कंपनी टालमटोल कर रही है। इसलिए उन्होंने परेशान होकर फोरम में याचिका दायर की है।

क्या कहा फोरम ने

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फोरम के अध्यक्ष डॉ ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा, सदस्य प्रभात कुमार चौधरी और लीला जोशी ने फैसला याचिकाकर्ता के पक्ष में सुनाया। फोरम ने सहारा इंडिया को सभी 12 याचिकाकर्ताओं की जमा राशि के साथ ही मानसिक क्षति पूर्ति और वाद व्यय के तौर पर ₹5000 देने के आदेश दिए। कंपनी को यह धनराशि 2 माह के अंदर अदा करने के आदेश दिए।

केस स्टडी 2
जिला उपभोक्ता फोरम ने रांची रोड बिहार शरीफ स्थित सहारा इंडिया को जमा करता के फिक्स बॉन्ड की राशि भुगतान का आदेश दिया।
शिकायत वाद संख्या 63/14 के तहत लहरी थाना क्षेत्र के मुरारपुर निवासी शीला देवी ने छती पूर्ति सहित परीपक्कता राशि के ₹162000 वसूली के लिए सेक्टर मैनेजर सहारा इंडिया बैंक को विपक्षी बनाते हुए मामला दर्ज किया था। जिसके अनुसार आवेदिका ने 31 जुलाई 99 को एस 14 स्कीम का फिक्स डिपाजिट बांड विपक्षी से लिया था जिसकी परिपक्वता राशि 31 जुलाई 2015 को ₹112000 विपक्षी को भुगतान करना था।
परंतु विपक्षी ने भुगतान के बदले टालमटोल का सहारा लिया और भुगतान के बदले यह कहा कि राशि कनवर्जन के द्वारा किसी अभिषेक कुमार के नाम पर जमा की गई थी। जो जमा कर्ता को भुगतान कर दी गई। उपभोक्ता फॉर्म के अध्यक्ष कामेश्वर नारायण, सदस्य मोहम्मद गयासुद्दीन ने विचारो उप्रांत फैसला दिया कि विपक्षी का स्पष्टीकरण युक्ति संगत नहीं है। क्योंकि कन वर्जन की स्थिति बांड का मूल प्रमाण पत्र आदि आवेदिका के पास नहीं होना चाहिए, बल्कि वह बैंक में होना चाहिए था। दूसरे विपक्षी उनके ऊपर लगे फ्रॉड और धोखाधड़ी के आरोप में झुठला नहीं सके। अतः राशि का भुगतान न करना गंभीर सेवा त्रुटि है। अतः निर्देश दिया जाता है कि 45 दिन के अंदर परिपक्तता राशि सहित कुल ₹119500 का भुगतान करे। न करने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करना होगा।


केस स्टडी 3
जिला उपभोक्ता फोरम ने सेवा में गड़बड़ी पाए जाने के बाद सहारा इंडिया की सासामुसा शाखा के शाखा प्रबंधक को सुद सहित जमा राशि का भुगतान 2 माह के अंदर करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही ₹15000 का जुर्माना भी किया है।
उचका गांव थाने के रामपुर गांव में अवध किशोर प्रसाद ने सहारा इंडिया की सासामुसा शाखा में 28 दिसंबर 2007 को ₹21000 फिक्स किया था दिसंबर 2018 में उन्हें परिपकक्ता राशि का भुगतान किया जाना था। लेकिन परीपकता पर उन्हें राशि का भुगतान नहीं किया जा सका था । तब उन्होंने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद फोरम में जमा ₹21000 का 9% ब्याज के साथ 2 माह के अंदर भुगतान करने का आदेश दिया। इसके साथ ही आवेदक को हुई शारीरिक, आर्थिक व मानसिक क्षति पूर्ति के लिए ₹10000 व मुकदमा खर्च के लिए ₹5000 का भुगतान करने का भी आदेश दिया। निर्धारित समय के अंदर राशि का भुगतान नहीं करने पर शाखा प्रबंधक को 12% की दर से ब्याज का भी भुगतान करना पड़ेगा।
कुल मिलाकर निष्कर्ष यही निकलता है सहारा इंडिया परिवार के खाताधारकों को अब उपभोक्ता फोरम का ही सहारा है।
यदि आप भी इस तरह के मामले से परेशान हैं तो कमेंट में हमें बताएं हम हरसंभव आपकी सहायता के लिए तत्पर हैं।
हमारा मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं है अमल करने हेतु स्वविवेक का उपयोग करें।

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